
Candlestick का इस्तेमाल trading patterns समझने के लिए किया जाता है। pattern यानी एक खास तरह की घटना जब एक खास तरीके के संकेत देती है तो उसे pattern कहते हैं। Technical analysts pattern के आधार पर ही अपना ट्रेड यानी सौदा तय करते हैं। किसी भी pattern में दो या दो से ज्यादा candle एक खास तरीके से लगे होते हैं। लेकिन कभी - कभी एक Candlestick से भी pattern समझा जा सकता है। इसलिए Candlestick pattern को single candlestick pattern यानी एक candlestick वाले pattern और multiple candlestick pattern यानी कई candlestick वाला pattern में बांटा जा सकता है।
एक candlestick pattern एक दिन का प्राइस का high, low, close, तथा open price को दिखाता है बल्कि आपको एक ही candle मे सब कुछ पता लग जाता है। जब market open होता है तो किसी भी कंपनी के उस दिन के candle मे market खुलते ही एक open price रिकॉर्ड हो जाता है फिर जैसे ही price सबसे ऊचा जाता है तब price रिकॉर्ड होता है उसके बाद जब price सबसे नीचे जाकर close होता है वहां price रिकॉर्ड कर लिया जाता इस तरह हमे एक candle मैं एक दिन के market मैं क्या क्या हुआ सभी जानकारी मिल जाती हैं लेकिन रोज market एक जैसा व्यवहार नहीं करता इसलिए रोज तरह तरह के अलग-अलग pattern मै candle बनते रहते है।

candlestick के यदि इस बेस को समझ जाए तो मुख्य रूप से दो तरह के ही candle बनते है जिस में पहला bullish candle होता है जिसे green colour से दर्शाया जाता है जिस में price को 4 तरह से दिखाया जाता है। जिसके बारे मे हम ऊपर बात कर चुके है।
दूसरा bearish candle होता है जिसे red color से दर्शाया जाता है इसके भी चार तरह के price जैसे की open, high, low, तथा close price होते है लेकिन green candle ( bullish candle) का मतलब यह हुआ की उस दिन वह candle अपने पिछले close price के ऊपर बंद हुआ और red candle (bearish candle ) का मतलब यह हुआ की उस दिन यह अपने पिछले candle के close price के नीचे बंद हुआ।




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